एक वक्त था जब लगा की जिंदगी का ये सफर सही पटरी पर है..
ये कहां पता था जिस वक्त में ये सोच रहे थे वो वक्त भी अपना ना है..
वक्त गुज़र गया ज़िंदगी की पटरी कब दागमगा गई एहसास ही ना हुआ..
मां बाप की चेहरे पर शिकन का सामना हुआ..
खुद ही मन में सोच कर ये कमबख्त जिंदगी को प्यार करने की कोशिश कर रहा है..
कि क्या पता शायद ऊपर वाला भविष्य में कुछ अच्छा लिख रहा है।
