बादलो की गरज हो या मौसम तूफानी है
देश की रक्षा में जाने कितने देते कुर्बानी है
दुश्मनों से कह दो आंख न उठे गलती से
समुंद्री लहरों पे खड़ा हर शेर हिंदुस्तानी है!
बादलो की गरज हो या मौसम तूफानी है
देश की रक्षा में जाने कितने देते कुर्बानी है
दुश्मनों से कह दो आंख न उठे गलती से
समुंद्री लहरों पे खड़ा हर शेर हिंदुस्तानी है!