मन की बात मन में ना रखों,
कह दो मेरे मित्र तुम आज।
एक चिट्ठी लिखकर भेज दो,
लाज शर्म की गठरी बांध आज।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मन की बात मन में ना रखों,
कह दो मेरे मित्र तुम आज।
एक चिट्ठी लिखकर भेज दो,
लाज शर्म की गठरी बांध आज।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी