ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है!
मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है!
माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा-
सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख लेती है!
राजेन्द्र मेश्राम “नील”

ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है!
मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है!
माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा-
सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख लेती है!
राजेन्द्र मेश्राम “नील”