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मानव क्यो तू बदल गया

कविता – मानव तू क्यो बदल गया

समाज वही प्यार वही,
सोच समझ की भावना ।
अत्याचारी हो गये हम सब,
मानव तू क्यो बदल गया ।

रंग वही हैं अपने देश की,
अभिनेता नेता हो गये।
धोखाधडी की राहो मे,
मानव तू क्यो बदल गया ।

जुर्म हो रहा खुली आसमान तले,
भष्टाचारी के आह से।
आॅखे खोले देख रहे हैं,
मानव तू क्यो बदल गया ।

हर शाम प्याले का जाम,
सुबह जुवारियो का संसार ।
हर पल हैं मुसीबत का कहर,
मानव तू क्यो बदल गया ।

शहर बन गया बेवसी का,
नशेडियो के हवस से।
जीना भी मुश्किल हो गया,
मानव तू क्यो बदल गया ।

अत्याचार देख समाज के,
ऊब गया हूॅ देख कर ।
रो रहा हूॅ बेवस होकर,
मानव तू क्यो बदल गया ।

महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864

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