माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए
माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए।
मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे
तुम तो शब्दों को जानते हो
तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है
तुम केवल कामयाबी पहचानते हो।
माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए
माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए।
मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे
तुम तो शब्दों को जानते हो
तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है
तुम केवल कामयाबी पहचानते हो।