माफी एक हुनर है,
सत्य अहिंसा का पूरक है,
राम कृष्ण ईशा को प्यारा है,
बच सकते है शान तुम्हारे
बिगड़े काम बने तुम्हारे
झुक कर देखो एक बार,
बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे,
दो गांव की इज्जत आज बचे
सभ्यता संस्कृति फूल फले
दे दो माफी ले लो माफी
सच कांटों में भी फूल खिले
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कवि ऋषि कुमार प्रभाकर