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मुक्तक

शाशन कुशाशन लंगड़ा हुआ
कानुन किया बन्द आँख
चोरी करो बेईमानी करो
चाहे लड़कर तोड़ो कपार
अपनी किस्मत पर रोवो
चाहे रोवो जाति आरक्षण पर
खुनी होली कितना भी खेलो
अंधी बहरी हुयी हैं सरकार

महेश गुप्ता जौनपुरी

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