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मुक्तक

लुटा मैं आज खजाना आबाद बैठी हूं
तेरे रहमों करम से मैं बर्बाद बैठी हूं
जरा सी इज्जत बची हो तो लगा लेना गले से
नहीं तो मैं जिल्लत कि ज़िन्दगी अपना बैठी हूं

महेश गुप्ता जौनपुरी

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