आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें,
यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें।
कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन करें,
जिंदगी के क्रुध्द पल का आ बटोही हनन करें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें,
यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें।
कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन करें,
जिंदगी के क्रुध्द पल का आ बटोही हनन करें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी