मुक्तक Pt, vinay shastri 'vinaychand' 6 years ago दिन अरतालिस बन्द रहे सब घर के भीतर काम काज सब छोड़ व्यापार। फिर भी कोरोना जालिम बन हो गया बन्धु साठ हजार।।