संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो
सब दिखावा है मेरे व्यवहार में
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो.
डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत
उत्तराखंड
संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो
सब दिखावा है मेरे व्यवहार में
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो.
डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत
उत्तराखंड