आजकल थोड़ा खफा सा रहता है
जग रहा मगर सोया सा रहता है
पर जाने क्या है मजबूरी उसकी
वो बैठा हुआ थका सा रहता है ।
अशोक बाबू माहौर

आजकल थोड़ा खफा सा रहता है
जग रहा मगर सोया सा रहता है
पर जाने क्या है मजबूरी उसकी
वो बैठा हुआ थका सा रहता है ।
अशोक बाबू माहौर