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मुरझाइ कलिया

कुछ मुरझाइ हुइ कलियो को देखा
उनके पास गया तो एहसास हुआ
चाहत की खुशबू उनमे अब भी बाकी है।
बस आरजू है उन्हे, खिलखिलाहती धूप की
मोतियो सी बूंद की, निहारती नजरो की।
ये सब सोचते, मै चल पडा अपने रास्ते ओर ख्याल आया,
शायद वो मुरझाई हुइ कलिया हमारे दिल से वाकिफ है।

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