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मेरी तुम

दुनिया के सब सितारे तुम्हेँ देख जगमगाते हैं,
दुनिया की सब नदियों में तुम्हारी आवाज़ बहती है
फूल कोई भी हों मुझे उनमें तुम्हारे देह की गंध आती है
यद्यपि मैं तुमसे कभी नहीं मिला.

बहुत पहले एक कविता में कहा था कि
जब तुम्हें मेरी याद आये तुम मेरे ख़त पढ़ना
मैं ख़त लिख रहा हूँ
मेरी याद आये तो इन्हें पढ़ना
मैं तुम्हें आस पास ही मिल जाऊंगा
इन शब्दों को छूना ये मेरी उंगलियां हैं
ये तुम्हें मुझ तक पहुँचा देंगी

-अभिषेक तिवारी

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