Site icon Saavan

मेरी पंक्तियां

वाकया : बुरे फंसे…
वो हमें लंबी सैर पे ले गए,
माना, अच्छे – से घूमा लाए।
ये उनका शहर था जो ले गए,
फिर हमारे यहां आए, चले गए।
हां वो सैर वाले, नहीं मिल पाए,
हम वो दोबारा नहीं पलट पाए।

खुशनसीब हैं ये रंग भी, अपने रंगीन होने से नहीं ।
इसका राज भी तुम्हारा खूबसूरत होना ही है….

Exit mobile version