Site icon Saavan

यश-अपयश में एक समान

सबसे गहरी यह बात है मन
तूने स्थिर रहना होगा,
कभी कहीं, कभी कहीं,
ऐसे न तुझे बहना होगा।
एक लीक एक धारा,
एक मार्ग हो साधन एक
एक नजर रख मंजिल पर
ऐसे तुझको बढ़ना होगा।
न क्रोध, न दर्द, न उलझन हो,
उत्साह सजा सा हरदम हो,
रह तू एक समान सदा मन,
लाभ अधिक हो या कम हो।
यश-अपयश में एक समान
गाली हो या हो गुणगान,
कभी न विचलित हो तू मन,
पथ रोशन हो या फिर तम हो।

Exit mobile version