।यादें।
मेरी रग रग मे आप बसे हो
आप ही का साया हूँ मैं।
कैसे जी लू आप के सहारे के बिन
जब आप ही का साया थीं मैं।
याद आते हैं जब वो पल
कुछ और न याद रह पाता है।
तेरी वह कलाई जिसको पकड़ कर
चलना सीखा।
अब उससे बिना ही रहना सीखना है अब मुझें।।
यादें।
