Site icon Saavan

रम तू जा माँ के चरणन में

रम तू जा माँ के चरणन में
घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में।
छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में।
बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में।
अतः आज मौका है भुना ले, बिठा दे फूलन में।
कहे सतीश माँ ही ईश्वर है, यह बैठा ले मन में।

Exit mobile version