यूँ राह पे चलने आए थे, एक जगह से प्यार हो गया
कुछ देर ठहरने को सोचा था, पर यहा दिल को एतबार हो गया,
रूके यहा तो एहसास हुआ की जन्नत मुक्कमल हो गई
पर हमे थोडी पता था, हमारी नजरे कही खो गई,
जैसा चाहा, जैसा मांगा सब वैसा ही लग रहा था
पर नजाने क्यू कही न कही, दिल का एक कतरा दुख रहा था,
थोडा होश मे आए और फिर सच का दीदार हुआ
ये जो बाग देख रहे थे, ये किसी और के लिए था खिला हुआ,
फूल जो हमने तोडा एक, वो भी हमसे छीन लिया
चाहत की खुशबू को हमसे, देखो उसने दूर किया,
अब रहा पे चलते जाना हमको, किसी मोड ना रूकना है
क्या पता फिरसे कोइ कहा, झूठ सजाए बैठा है।