रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं,
अखियाँ तुझे देखन को तरसीं।
बिजली चमक रही है चम-चम,
बरस रहा है पानी छम-छम।
नभ में काली बदली छाई,
शीतल पवन याद ले आई।
सूर्य नहीं आज अम्बर में,
बादल कर रहे मनमानी,
भीगी मेरी चूनर धानी॥
_____✍गीता
रिमझिम बूंदें


रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं,
अखियाँ तुझे देखन को तरसीं।
बिजली चमक रही है चम-चम,
बरस रहा है पानी छम-छम।
नभ में काली बदली छाई,
शीतल पवन याद ले आई।
सूर्य नहीं आज अम्बर में,
बादल कर रहे मनमानी,
भीगी मेरी चूनर धानी॥
_____✍गीता