गीत

दर्द का जो स्वाद है

दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है, मुफ्त है जग में, खुदगर्जीया ! मक्कारियां सरेआम है, दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है। मदहोशियों का माहौल हैं बहरूपियों की यहां फौज हैं, पराया यहां, किस -किस को कहें, अपनों की जरा खोज है, बैचेनियां, तन्हाईयां, बदनामियां! आजाद हैं, दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है। »

अहसास

तुम वो अहसास हो जिसे छू जाये वो संदल सा महक जाये तुम वो इश्क़ हो जिसे हो जाये वो दीवाना हो जाये!! »

कोरे मेरे,सपने मेरे…..

कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ उम्मीदें देंगी,दस्तक उन तक, उम्मीदें ही रह जाएंगी…. कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे…२ शामें देगी,उल्फत उनको, शामें ही रह जाएंगी… कोरे मेरे,सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ यादें लेगी, करवट उन तक, यादें ही रह जाएंगी… कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ »

प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं।

कौन है यहां अपना मेरा, तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा। कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं, प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं। कब तक यूं आस लगाऊ। कुछ तो बोलो, हे प्रभु! कब तक मैं यह ज्योति जलाऊ, बुझ रही आशा की लौ, कैसे इसमें प्रकाश जगाऊं, प्रभु मैं तुझको कैसे पाऊं। »

हे प्रभु! तुम ही तो हो।

हे प्रभु! तुम ही तो हो। तुम हो सृजन दाता, तुम हो रचना निर्माता। तुम हो जीवन की आस, तुम ही हो निश्चित श्वास। तुम ही हो अमूर्त प्रेम, तुम ही दिशा और दिन। हे प्रभु! तुम ही तो हो। »

मेरे मन का मोती…

मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम । सुध लो प्रभु दुनिया की , यह नैन भी तरस गए । किस और किनारा है मेरा , बस नौका पार लगा दो । मेरे राम मेरे श्याम…. भूलूं कभी न तेरा नाम , यह अरदास जगा दे । तेरे से ही हो रौशन दुनिया मेरी, तेरे पर ही वारी जाऊं। मेरे... »

(गीत: माँ हिंदी)

जिस माथे पे चमके, हिन्द का नाम उन्हें हिंदी से मिलता, हो प्रथम ज्ञान। जन भाषी भाव वही, पथ पावन हो की माँ हिंदी का हिन्द, में सावन हो। की माँ हिंदी का हिन्द, में सावन हो हाँ माँ हिंदी का हिन्द, में सावन हो।। (महेश कुमार) »

एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया

एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया। तुम कपटी हुई , उससे धोखा किया ।। नारी तो होती है ममता की मूरत। क्या तुझको नहीं थी उसकी जरुरत।। ज़िन्दगी के बदले मौत का तोफा दिया। एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया।। अमर सुधा रस का तुम में है वास। फिर क्योंकर जहर को बनाया रे खास।। मित्र भी गए मित्रता भी गई पाक रिश्ते को तूने बदनाम कर दिया।। एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया। »

सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है

कविता : सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है जो खो गया है मेरी जिंदगी में आकर उस पर गजल लिखने के दिन आ गए हैं दिल दिमाग का हुआ है बुरा हाल अब तो रात भर जागने के दिन आ गए हैं प्यार की लहरें जब से दिल में उठ गई सजने संवरने के दिन आ गए हैं मोहब्बत ने वो एहसास जगाया है दिल में अब तो तकदीर पलटने के दिन आ गए हैं सच्ची मोहब्बत वो मझधार है संग इसके तैरने के दिन आ गए हैं वो ही करना पड़ा जो चाहा न दिल ने कभी इ... »

देश गान

माँ तुम्हारे चरणों को धोता है हिन्द सागर। बनके किरीट सिर पे हिमवान है उजागर।। माँ….. गांवों में तू है बसती खेतों में तू है हँसती गंगा की निर्मल धारा अमृत की है गागर।। माँ…. वीरों की तू है जननी और वेदध्वनि है पवनी हर लब पे “जन-गण” कोयल भी ” वन्दे मातराम् ” निश-दिन सुनाए गाकर।। माँ…. विनयचंद ‘बन वफादार निज देश के तू खातिर। तन -मन को करदे अर्पण क्या है ... »

बरखा की फुहार

तपती धरती पर पड़े, जब बरखा की फुहार, सोंधी सुगन्ध से महके धरती, ठंडी चले बयार। मयूर नाचे झूम – झूम कर, बुलबुल राग सुनाए, तितली प्यारी आए सैर को, कोयल कुहू – कुहू गाए। मधुकर की मीठी गुंजन है, पपीहा गाए राग – मल्हार, तपती धरती पर पड़े जब बरखा की फुहार….. »

ॐ साई राम

बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम सांई नाम की अलख जगा ले भोली सी सूरत अपने मन में बिठा ले सच्चा प्यारे सांई नाम बाबा जी जपूं मैं तेरा नाम कृपा दृष्टि की तेरी माया मन कोमल मृदु शीतल काया तेरी महिमा कोई जान न पाया मुखमंडल पर आभा की छाया प्यार का जो अमृत बरसाया सुमिरन कर लो सांई नाम बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम मन में अपने भाव जगा लो जिस चाहे उस रूप में पा लो मिट जाता मन का अंधियारा मन को मिलता शांत किनारा भटके... »

गणपति बप्पा मोरिया

बुद्धि विनायक पार्वतीनंदन ,मंगलकारी हे गजबंदन वक्रकुंड तुम महाकाय तुम ,करता हूँ तेरा अभिनंदन कंचन -कंचन काया तेरी ,मुखमंडल पर तेज समाया है मूषक वाहन करो सवारी ,मोदक तुमको प्यारा है भक्ति भाव में तेरी देखो,खोया ये जग सारा है मोहनी मूरत सुन्दर सूरत भोले बाबा के तुम प्यारे हो गौरी माता के लाल तुम्ही तुम ही आँखों के तारे हो विघ्न हरण तुम विघ्न को हर लो खुशियों से झोली को भर दो धन यश वैभव के भंडार भरो ... »

सच्ची आजादी दिला दो तुम

हे दीनबंधु,परमपिता परमात्मा, करते हम तुमसे बस यही प्रार्थना, सच्ची आजादी दिला दो तुम , एक ऐसा देश बन दो तुम। बेटियां जहां कोख में ही ना मारी जाती हो, हर घर में हर नारी सुख सम्मान पाती हो। माता पिता को जहां पुत्र से सम्मान मिले, भाई भाई में राम लखन सा प्यार मिले। देश का हर नेता जहां भ्रष्टाचार मुक्त हो , देश का हर घर निर्धनता विमुक्त हो। शिक्षा जहां समान अधिकार से मिलती हो, हर कृष्ण को अपनी राधा मि... »

बादल की बौछार

दो बूँद गिरा गया बादल महका है धरती का आँचल बन सर्द पवन लहराई मिट्टी की महक-महकाई सब काम काज रुक गए हैं बादल के आगे झुक गए हैं ममता ने ली है अंगड़ाई लो सब ने प्यास बुझाई खामोश हुआ इंसान जब पड़ी गर्ज की चमक दिखाई पानी-की बौछार चलाके संगीत में सूर को मिलाके गालों को मर्म सहलाएँ कानों से थरथरी आएँ सप्तधनू आकाश में छाया देने सूक्ष्म श्रेस्ट बधाई दो बूँद गिरा गया बादल महका है धरती का आँचल बन सर्द पवन लहरा... »

अजनबी

आज किसी ने सोये हुये ख्वाबों को जगा दिया भूली हुई थी राहें भटके हुये मुसाफिर को मिला दिया जिंदगी का फलसफा जो कहीं रह गया था अधूरा मुरझाई हुई तकदीर को जीने के काबिल बना दिया देना चाहता था मुझे बहुत कुछ मगर उसे क्या पता था उसकी चाहत की उसी आग ने मेरा दामन जला दिया बस राख के कुछ ढेर बाकी थे वक्त की तेज़ आंधी ने उनको उड़ा दिया खाली पड़े उन मकानों में परछाईयाँ ही तो बस बाकी हैं वरना हालत के इस दौर ने सब क... »

फिर क्या जीना फिर क्या मरना

rajendrameshram619@gmail.com ************************ जलने दो हृदय की वेदना, विचलित मन से कैसे डरना | हो जीवन संताप दुखों का, फिर क्या जीना फिर क्या मरना || ~~~~~00000~~~~~ युद्ध अनघ है मन के भीतर, परितापों से प्राण पिघलते | दूर करो असमंजस बादल, मन पावक में कैसे जलते || धार बढा दो पराक्रमी तुम, कुरुक्षेत्र सा जीवन लड़ना | हो जीवन संताप दुखो का, फिर क्या जीना फिर क्या मरना || ~~~~~00000~~~~~ तुम में... »

अपने लहू से

समस्त देशवासियों को #स्वतंत्रता दिवस की 74 वी वर्षगांठ पर हार्दिक मंगलकामनाएँ राजेन्द्र मेश्राम-नील ******************* अपने लहू से तर, धरा का शृंगार कर, सोई हुई चेतना को, इतना तो भान दे | भावी वर्तमान भूत , सब को बिसारकर , कर तू नवल काज , देश को उत्थान दे | फूंक दे प्राणों में प्राण , है हो गए जो निष्प्राण , उनके हृदय चित्त , उर स्वाभिमान दे | जन्मदायिनी जो मेरी , मातृभूमी भारती है, विजयी पताका न... »

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा है टूट कर के ये, जुड़ा और जुड़ के फिर टूटा ! कहानी न महज समझो, नही कोई है ये किस्सा ! नही इतिहास ये पूरा, फकत छोटा सा है हिस्सा ! अभी भूले नही थे हम, पिछले/मुगली प्रशाशन को ! नज़र अंदाज़ कर सकते नही, गोरे कुशाशन को ! तृषित था तंत्र भारत का, ग... »

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा है टूट कर के ये, जुड़ा और जुड़ के फिर टूटा ! कहानी न महज समझो, नही कोई है ये किस्सा ! नही इतिहास ये पूरा, फकत छोटा सा है हिस्सा ! अभी भूले नही थे हम, पिछले/मुगली प्रशाशन को ! नज़र अंदाज़ कर सकते नही, गोरे कुशाशन को ! तृषित था तंत्र भारत का, ग... »

Karsni leeli

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त करियों सब बन्दी जन को,,,, चैन की बंसी बजैया,,,,,, तेरी लीला है अपरंपार,,,, 🌺🌹 लाल को मारन पूतना आई,,,, छाती को दूध पिलाया,, पिलियों दूध जो छाती को है,,,,, 🍁🍁 खुद पूतना को नीद (मार) सुलाया,,,, ते... »

Karsni leeli

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त करियों सब बन्दी जन को,,,, चैन की बंसी बजैया,,,,,, तेरी लीला है अपरंपार,,,, 🌺🌹 लाल को मारन पूतना आई,,,, छाती को दूध पिलाया,, पिलियों दूध जो छाती को है,,,,, 🍁🍁 खुद पूतना को नीद (मार) सुलाया,,,, ते... »

प्यार में भीगते-भिगाते रहो

आज जितना भी बरसता है बरस जाने दो, फिर तो सावन भी चला जायेगा, सींच कर कोना-कोना धरती का फिर तो सावन भी चला जायेगा। आज जितना भी चाहो भीगो तुम प्यार ही प्यार भरा मौसम है, प्यार में भीगते-भिगाते रहो, फिर तो सावन भी चला जायेगा। »

कृष्णलीला

*कृष्ण लीला* तू दधि चोर तो; तोही न छोडूं, पकड़ बांह तोरे; कान मरोड़ूँ ! लल्ला मेरो मोही हिय ते प्यारा तोसे कुढ़त गोकुल ब्रिज सारा *खा सौं अब तू मोरी,* *न करिहउँ अब मै चोरी* !! जग के पालक: जननी के बालक, प्रहसन करते; जग संचालक ! जड़ चेतन बंशी सुन हिलते!! ग्वालन संग जमुना तट मिलते, *खा सौं अब तू मोरी,* *न करिहउँ अब मै चोरी* !! गाय चरैया, पर्वत को उठइया, बिषधर को, जमुना में मरैया ! पुरबाशिन को लाज न आवत, ... »

संजना

सावन में ए सखी, खनके क्यों कँगना। कोयलिया गीत सुनाए ,क्यों मेरे घर अँगना।। बार बार दिल धड़काए, प्यास जगाए। जाने क्या करेगी, मेरी नादान ए कँगना।। जब सुनती हूँ, “ए शोभा पियु कहाँ ” की मीठी स्वर। तब न पूछ सखी , घायल हो जाती है ए संजना।। »

– मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे!

मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! कभी राम नाम लिया तो नहीं । मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! नर तन लेकर इस जहां में आया नारायण को पाने को । भोग-विलास में रमा रहा । याद न आया कभी नारायण को ।। मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! कभी राम नाम लिया तो नहीं । मिथ रिश्ते-नातें में मैं यूँही बँधा ही रहा । कभी साँचा रिश्ता याद आया ही नहीं ।। मैंने व्यर्थ ही जिन्दगी गँवायो रे! कभी राम नाम लिया तो नहीं ।।... »

कपड़े बदले, वेश बदला, बदला घर-संसारा ।

कपड़े बदले, वेश बदला, बदला घर-संसारा । माया-मोह में फँसा रहा तु नर पर बदल सका न अपना व्यवहार । रे! क्या-क्या बदला तु इंसान-2 तन को धोया नित-नित दिन तु, पर मन को धोया कभी नहीं अगर एक बार जो मन धो लो हो जाये तन तेरा शुद्ध । रे! क्या-क्या बदला तु इंसान-2 मन शुद्ध है तो तन शुध्द है, आहार शुध्द तो विचार शुद्ध है । जल शुद्ध है तो वाणी शुद्ध है, संगत शुद्ध तो रंगत शुध्द है । रे! क्या-क्या बदला तु इंसान-2... »

आजा-2 मेरे राम दुलारा ।।

कौसल्या का आँख का तारा, दशरथ राम दुलारा । कैकयी सुमित्रा का है तु सबसे प्यारा आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। उर में तेरा भरत का वासा, संग में रहते लक्ष्मण न्यारा । शत्रुघ्न है तेरा सबसे प्यारा । आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। हनुमान है तेरा भक्तों में निराला, और जपत रहत राम-नाम का माला ।। आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। शक्ति है तेरी सीता मईया । भक्ति है तेरी सबरी मईया ।। आजा-2 मेरे राम दुलारा ।। प्रेम निश्चल है भक्... »

पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से ।

पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । पर क्या खाक मिला हमें, तुझसे ओ बेवफा मुहब्बत करने से ।। पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से । उनको मुहब्बत मिले जहां मे, जो तेरे हुश्न गुलाम हो ।। हम तो सिर्फ दिल-ही-दिल में चाहें, क्योंकि तु न बदनाम हो । पत्थर को पूजते-पूजते थक गये हम कई वर्षों से ।। तु मेहरबां जो मुझसे होते, बदनसीब हम न होते । कट जाती यूँही जिन्दगानी खुशियों से, हम दुःखी ना ह... »

अपनी अदा देखाकर हुश्न के बाजार में मेरा भाव लगाया तुमने।

अपनी अदा देखाकर हुश्न के बाजार में मेरा भाव लगाया तुमने। मिल गया कोई रईसजादा तो इस मुफलिस गरीब को ठुकराया तुमने।। मेरी मुफलिसी का औकात दिखाया तुमने । रईसों के महफिल में मेरा मजाक उड़ाया तुमने ।। मेरी मुफलिसी का औकात दिखाया तुमने । पत्थऱ समझके ठुकराया तुमने। खिलौना समझके खेला तुमने।। मेरी मुफलिसी का औकात दिखाया तुमने। वफा के हर मोड़ पर बेवफाई निभाई तुमने। अपनी निगाहों का सहारा देकर, गैरों को निगाहो... »

नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें ।

नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें । जहां की सारी खुशियाँ झुके तेरे कदम,ये दुआ है मेरे ।। नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें ।।1।। लगे तेरे नसीब की हर एक बला हमें, मााँगु रब से यही दुआ मैं । न आये तेरे नसीब में वो घडी कभी, जो तुझे मेरी जरूरत पडे ।। नये लोग, नयी शहर, नयी जहां मुबारक हो तुम्हें ।।2।। जिये जहाँ में तु जहां के साथ मुस्कुरा के सदा । न छूटे तेरे लबों की हँसी वो कभी ।... »

जय जय जय जय जय श्री राम

जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज के वंशज इस जग में तुम काल अजय हो तुम्हरे नाम में चारों धाम, जय जय …. धर्मात्मा तुम अधर्मि नाशक, सर्वश्रेष्ठ,तुम मानव के नायक, हर सुख का बस एक ही नाम जय जय…. ~अजित सोनपाल »

जय जय जय जय जय श्री राम

जय जय जय जय जय श्री राम मर्यादा के दुसरे नाम, जय जय…. वन वासी भये तज के राज इस जीवन के तुम कृपा निधान जय जय…. मानवता के सूत्र पिरोये, तुम शौर्य, तेज, सूरज के वंशज इस जग में तुम काल अजय हो तुम्हरे नाम में चारों धाम, जय जय …. धर्मात्मा तुम अधर्मि नाशक, सर्वश्रेष्ठ,तुम मानव के नायक, हर सुख का बस एक ही नाम जय जय…. ~अजित सोनपाल »

हम दीन-दुःखी, निर्बल, असहाय, प्रभु! माया के अधीन है ।।

हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी, लोभी, भिखारी, दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है । प्रभु तुम माया के स्वामी, दाता-विधाता, निर्गुण,निर्विकार, सनातन पुरूष महान हो ।।1।। हम इन्द्रियों के दासी, भोगी-विलासी, कामी, आताताई,अग्यानी, दुष्ट मानव है। प्रभु तुम जितेन्द्रिय,गुणों के स्वामी,बुद्धिमान, सकल जगत के स्... »

मेरे अल्फाज अब कहाँ रहें, ये तो तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई ।

मेरे अल्फाज अब कहाँ रहें, ये तो तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई । ये तो तेरे हुश्न-शबाब में खोया है, तेरी मुहब्बत में ये कुछ कहता है । ये मेरे अल्फाज़ रहे अब कहाँ, ये तो तेरी हुश्न की जहागीर हुई । तेरे दर्द को समझे तेरे हँसने पे ही कुछ कहें ये तो तेरी जहागीर हुई ।।1।। मेरे अश्क अब बहते कहाँ ये तो सागर की लहरों में गुम हुई । ऊँची तरंगे, लहर-तुफानी, चक्रवात-बवंडर सी बनी जिन्दगानी हमारी । तुझसे मुहब्बत क्... »

बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।

बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा । कभी याद आया कभी दिल को दुखाया । ओ जाना-2 कहाँ खोया-खोया जरा तो बताना । बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।।1।। वफा की रंगी दुनिया में रंगा था हमारा घर-आँगन । अब सावन की झुला भी तेरे बिन लगे है सुना-सुना । अब तो जा झलक दिखा जा कहाँ है खोया-खोया । बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।। 2। । न मैं माँगु तुझसे अब कोई वो कसमें पुराना । तुम तो मुझे भुल चुकी पर मैं क्यूँ मज... »

मैं जानता नहीं हूँ

मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ? किसी राह पे मिली मंजिल है या तुम कोई किनारा । मगर दिल इतना मेरा अब टूटा किसी पे एख्तियार रहा ना मेरा । ये सदियों से किसी राह पे भटका मन है, ये माने कैसे कोई मेरा भी आज हमसफर है ? मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ।।1।। जग में भीड़ बहुत है, पर तन्हा सब नर है । प्रेमी प्रेमवियोग में रम है, दुखियाँ दुःखों से तंग है । सुख भी कहाँ रहती नरों के संग सबदिन है । ... »

तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे

तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे वो ख्याब नहीं जिन्दगी है मेरी । ख्याब के सहारे कटते नहीं दिन, रात भी है बोझिल दिन भी है सुना । भूले है सपने, फूटी किस्मत, टूटे है रिश्ते, बिखड़े सहारे । तेरे……. ।।1।। आ देख जरा तुम इन वादियों को, लगते है रिश्ते अपने सदियों पुराने । मगर तुम न जाने मुश्किल हमारी, राहें कठिन है, चलना तेरे संग है । तेरे संग ही जिन्दगी, मौत से डर नहीं, रहनुमा तेरा प्यार है । तेर... »

बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे ।

बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे । दुनिया की न लगे बला तुझे , ईश्वर की रहमत साथ तेरे ।। जा-जा री बहना प्रातःबेला है संग तेरे -2 छाँव-छाँव में बीते जिन्दगी तेरी, चुँभे न काँटे तेरे किस्मत । हर दुखःतकलीफ हर ले ईश्वर तेरी, ईश्वर की साया है साथ तेरे ।। जा-जा री बहना गरीबी न झाँके तेरे दर पे कभी-2 तु दीन-दुःखी के स्वामिनि बने, तेरे दर पे लगे संतों की जमघट । तेरे घर में सदा हो रामकथा , ... »

मुझसे ये हाल दिल का (गीत)

मुझसे ये हाल दिल का कहीं कहा नहीं जाता है । पास तुम होते मगर तुमको ये बताया नहीं जाता है । जानता हूँ कि तुझे प्यार है मुझसे बेपनाहं सनम । ये तुमसे भी बयां नहीं किया जाता है ।। तपड़ते है ये दिल तुझसे बिछु़ड़के । रात कटती है तारे गिन-गिन के । सुबह होती है नई आश लेके । तेरे बैगैर जिये न जिन्दगी यहीं ख्याल रहता है ।। दुनिया में एक तेरे सिवा कुछ भाता नहीं । जहां की सारी खुशियाँ तेरे बेगैर अधुरी-सी लगती... »

आया राखी का पावन त्योहार भैया

आया राखी का पावन त्योहार भैया। तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई। मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।। आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया। आजा, तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। आया राखी का पावन त्योहार भैया……।। सब मंगल भरे हैं इन धागों में यार। ना मामूली है इसमें बहना का प्यार। दिल से दिल का ये है आधार भैया। जरा सुन ले ‘विनयचंद ‘ पुकार भैया। आजा, त... »

बारिश

मन किसी सूखी नदी सा हो रहा आप कहती हो कि बारिश आ गई, जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस एक सूनापन सा मन में गड रहा, कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ बूंदाबांदी ही रहेगी प्यार की, कब तलक बिछुड़े रहेंगे आप हम कब तलक बरसेगा खुलकर आसमाँ, —————- Dr. सतीश पांडेय »

आत्महत्या न कर

आत्महत्या न कर जिन्दगी को बचा, कोई दुख तेरे जीवन ज्यादा नहीं। देख चारों तरफ जो घटित हो रहा ढूंढ खुशियां उसी में, दुखों को नहीं। दुःख तो आते रहेंगे जाते रहेंगे। तेरा आना न होगा दुबारा यहां। रूठ जाये भले तुझसे संसार यह, पर स्वयं से कभी रूठ जाना नहीं। भोग ले सारे संसार के सुख व दुख पर दुखों स्वयं को डराना नहीं। आस मत रख किसी से जी बिंदास बन अपने जीवन ऐसे डुबाना नहीं। और बुझदिल न बन कर ले संघर्ष तू आत... »

जुदाई का दर्द

जुदाई का दर्द कांटों से ही प्रेम हो गया ,कलियां दिल में चुभती है दर्द भारी यादों में तेरी मेरी अखियां जगती हैं ज्यादा जुल्म किया फूलों ने कांटे बस बदनाम हुए जो चुभते रहते थे वो ही जख्मी दिल के बाम हुए। अपने हुए पराए जैसे जो इस दिल में रहते थे बने गैर मेरे अपनों से, जिनको दुश्मन कहते थे उर में गहरा घाव हुआ है पीर नहीं रोका जाता बाढ़ असीमित है दृग में ये नीर नहीं रोका जाता एक नहीं सौ बार तुम्हारी या... »

Hariyali teej

Har ang hai jaise khila khila … Jabse piya tera pyar mila .. Khud mai he simte ,khud mai he khoye .. Jaise Chanda ki baho mai chandni hai soye .. Rup nikharu ..khud ko sawaru .. Aaja piya tere raah niharu .. Bechain hai din simatne ko Tere baho mai… Nigahe kab se tike hai Tere raho Mai …. Aaja ab to sawan aaya … Pyar bhara mosam hai laya . »

मौसम सुहाना सावन का

मौसम सुहाना सावन का आया, संग अपने उत्सवों का पिटारा लाया ठंडी ठंडी ये बहती पवन, बागों में खिले हैं कितने सुमन आए जब बरखा की फुहार, पिया भी करे हैं मनुहार अंगना में भीगे मेरी धानी चुनर, पिया को भाएं मेरे सारे हुनर गीत लिखूं या खिलाऊं मैं खाना, वो हंस के बोलें एक और तो लाना सखियां सारी दिखाएं मेहंदी वाले हाथ, मां गौरी से मांगू मैं सदा “उनका”साथ »

स्वतंत्रता दिवस (Independence day

ले के तिरंगा नारा लगाया, जय जवान जय किसान। देश के ख़ातिर मरना सिखाया, वाह रे वीर इन्सान।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में आज़ादी के डंका बाजे। धरती से लिपटा तिरंगा तीन रंग में देखो कैसे साजे।। कई वर्षों बाद माँ का सपना आज हो गया साकार । तभी तो मनाया स्वतंत्रता दिवस भारत में पहली बार।। »

….. तभी तो (Independence day)

हिमालय से गंगा के मिलन ,यही तो देश की पहचान है। तभी तो हम सब, गर्व से कहते हैं मेरा भारत महान है।। शास्त्री गोखले मौलाना राजेन्द्र, सभी देश के शान है। तभी तो हजारों वीर, हिन्दुस्तान पे आज भी कुर्बान है।। सरोजनी लक्ष्मी उषा इंदिरा, सभी आर्यावर्त के वरदान है। तभी तो धरती माँ को, अपने वीरांगनाओ पे अभिमान है।। जो कर गुजर गए उन पर ही, आज भारत मेहरबान है। तभी तो हम उन क्रान्तिकारियों के आज भी कदरदान है।... »

गीत

रिमझिम बरसे सावन सजना। झूले लगे हैं मोरे अंगना।। सब सखियों के आए सजना। क्यों है सूना मेरा अंगना।। आजा अंगना के भाग जगा दे। बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।। लहगा चुनरी ले के आऊँ। हरी चुड़ियाँ साथ में लाऊँ।। हाथों में मेंहदी लगा के रखना। सनम आऊँगा मैं तेरे अंगना।। सारे लाज शरम तू भगा दे…. सनम मोहे झूला झूला दे।। »

राखी बंधन

अब के बरस भैया पीहर ना आऊं, बांधन को राखी तोय रे रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है, नजर वो रखे है मोए पे डाक से भेजी है भैया को राखी, भतीजी से लियो बंधवाए रे अगले बरस बैरी कोरोना का अंत होगा, फिर बांधूंगी राखी ,तोए आए के »

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