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रिश्ते

जिंदगी के सुरों में यदि तासीर चाहिए,

तो वफा ईमानदारी और बस प्यार चाहिए।

वरना सारे सुर ,
बेसुरे नजर आएंगे।

प्रेम को वो सौंदर्य पूर्ण …
समुंद्र सी गहराईया ना दे पाएंगे।

इंद्रधनुषी रंग भी… बदरंगे से लगेंगे।

रिश्तों के सभी रंग फीके से लगेंगे।

जिस लाल मूंगे की तलाश में हम गहराइयों में जाना चाहते हैं!!

वहां सुनसान रेगिस्तान ही पायेंगे।
जिंदगी फटे बांस की बांसुरी सी बज उठेगी,

जब रिश्ते अपनी -अपनी ढपली
अपना- अपना राग गुनगुनाएंगे।

निमिषा सिंघल

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