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रेप

अंधेरी रात में जब सब कुछ शांत था
मन की एक चीक जो सुनाई दे रही थी
जो मुंह से निकल नहीं रही थी।
वो आंसू जो बहार नहीं आ रहे थे
दुख बनकर अपने शरीर से नफरत करना सिखा रहे थे।
खुदखुशी जीने से आसान लगने लगी थी।
ये कहानी है उस लड़की की जो किसी के हवस का शिखर होते होते बची थी।

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