लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है
इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है
कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब
अपने होठों से हमने इसे गाया है
लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है
इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है
कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब
अपने होठों से हमने इसे गाया है