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ललकार

देखो चली नौजवानो की टोली।
खेलेंगे लाल फिर लहू की होली।।
चारो दिशाओं में गूंज रहा है।
इंक़िलाब जिंदाबाद की बोली।।
अग्निपथ पे चल पड़े है सपूत।
ललकारे छोड़ के आसमां में गोली।।

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