मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद।
गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद।
शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं,
समय बिताने का अवसर मिला सुखद।
देवेश साखरे ‘देव’
मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद।
गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद।
शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं,
समय बिताने का अवसर मिला सुखद।
देवेश साखरे ‘देव’