किसी भी हाल में तुझसे
नहीं पीछे रहूंगी मैं,
तू लिखना रात भर कविता,
सुबह जग कर पढूंगी मैं।
तेरी हर एक कविता पर
हंसूगी और और रोऊँगी,
लिखेगा जो भी बातें तू
मनन करती रहूँगी मैं।
किसी भी हाल में तुझसे
नहीं पीछे रहूंगी मैं,
तू लिखना रात भर कविता,
सुबह जग कर पढूंगी मैं।
तेरी हर एक कविता पर
हंसूगी और और रोऊँगी,
लिखेगा जो भी बातें तू
मनन करती रहूँगी मैं।