बड़ी बात करते हैं लोग
पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं
कुछ अभिलाषा मन में जागे तो
फिर कुबड़ाई करते हैं
लेखनी को दूषित करते हैं
अपनी कुत्सित सोंच से
दूसरे की ना सुनते बस
अपनी ही कहते रहते हैं
बड़ी बात करते हैं लोग
पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं
कुछ अभिलाषा मन में जागे तो
फिर कुबड़ाई करते हैं
लेखनी को दूषित करते हैं
अपनी कुत्सित सोंच से
दूसरे की ना सुनते बस
अपनी ही कहते रहते हैं