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वक्त की फ़ितरत

वक्त की फ़ितरत में तब्दीली है,
जो आज हमारा है वो कल किसी और का होगा।
न कर ग़रूर आज पर अपने।
आने वाला कल न जाने कैसा होगा।
______✍️गीता कुमारी

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