सुखद है मित्रों का संसार ,
बरसता निशदिन प्यार अपार।
नहीं भौतिक है, है अध्यात्म ,
मित्र की महिमा अपरंपार ।
– जानकी प्रसाद विवश
सुखद है मित्रों का संसार ,
बरसता निशदिन प्यार अपार।
नहीं भौतिक है, है अध्यात्म ,
मित्र की महिमा अपरंपार ।
– जानकी प्रसाद विवश