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सुनो ना

एक बात कहनी थी
तुमसे प्यार था या पता नहीं क्या था पर कुछ तो हुआ था हमें भी,
इतने करीब आए थे हम जिस्मो का पता नहीं पर रूह छू गए थे हम भी,
बिन बात के मुस्कुराना सीख गए थे हम भी,
बिना सोए सपने सजाना सीख गए थे हम भी,
एक रोज बनूंगी उसकी उसके झूठे वादों पर एतबार करना सीख गए थे हम भी,
जब थोड़ा था उसने तो खुद को संभालना सीख गए थे हम भी,
बस कुछ ना सीख पाए तो यह उसकी यादों से छुटकारा कैसे पाएं,
उसके किए हुए वादों से कैसे मुकर जाए मिले,
ना मिले वह जी लेंगे हम भी,
बस जीते जी मरना सीख गए हम भी|

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