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सोने से कितना प्यार तुझे

सोने को नित धारण कर
शीशमहल में सोने वाली
सोने से कितना प्यार तुझे

शिकायत मुझसे है लेकिन
इज़हार प्यार का करती हो
कैसा मुझसे है तकरार तुझे

भोर के जैसी निर्मल काया
स्वर्णमयी रंग जिसपे छाया
सुबह से क्यूं इनकार तुझे

सजना है प्रकृति के साथ
चलना है जीवन भर साथ
करना सबसे मधुर ब्यवहार तुझे

इक घर की बगिया सजाकर
स्वघर को भी महकाया तूने
हर जन का है आभार तुझे

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