हम वह नशा हैं, जो कहीं बिकते नहीं।
जिसे लत लग जाए तो फिर छुटते नहीं।
कीमत मेरी तो फकत प्यार ही है दोस्तों,
लगा लो लत, दस्तकस कहीं रुकते नहीं।
दुनिया में कोई कमी नहीं, नशे की दोस्तों,
प्यार से बढ़कर नशा, कहीं मिलते नहीं।
देवेश साखरे ‘देव’
हम वह नशा हैं, जो कहीं बिकते नहीं।
जिसे लत लग जाए तो फिर छुटते नहीं।
कीमत मेरी तो फकत प्यार ही है दोस्तों,
लगा लो लत, दस्तकस कहीं रुकते नहीं।
दुनिया में कोई कमी नहीं, नशे की दोस्तों,
प्यार से बढ़कर नशा, कहीं मिलते नहीं।
देवेश साखरे ‘देव’