हर एक इंसान के चेहरे को पढ़ लेना, हर किसी के बस की बात नहीं।
निज स्वार्थ से ही फुर्सत नहीं मिलती, ठहर जाता मन स्वयं पर ही।
स्वरचित एवं मौलिक
–✍️ एकता गुप्ता*काव्या*
हर किसी के बस का नहीं


हर एक इंसान के चेहरे को पढ़ लेना, हर किसी के बस की बात नहीं।
निज स्वार्थ से ही फुर्सत नहीं मिलती, ठहर जाता मन स्वयं पर ही।
स्वरचित एवं मौलिक
–✍️ एकता गुप्ता*काव्या*