नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो
देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो
मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो
मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ।
सभी मित्रगण को सावन का प्रथम सोमवार शुभ हो।
नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो
देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो
मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो
मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ।
सभी मित्रगण को सावन का प्रथम सोमवार शुभ हो।