होंठो पर झूठी हंसी और आँखों में नमी लिए बैठी थी,
वो अंदर से हजार बार टूटकर भी बाहर से जुडी बैठी थी।।
राही (अंजाना)
होंठो पर झूठी हंसी और आँखों में नमी लिए बैठी थी


होंठो पर झूठी हंसी और आँखों में नमी लिए बैठी थी,
वो अंदर से हजार बार टूटकर भी बाहर से जुडी बैठी थी।।
राही (अंजाना)