रंगों का त्योहार मनोहर
होली आई होली आई।
प्रेम प्रसून के गुलदता ले
होली आई होली आई ।।
दया का पानी प्रेम के रंग को
दिल दरिया में घोलो रे।
मधुर मनोरम मस्त मिठाई
भर भर थैली खोलो रे।।
‘विनयचंद ‘ के मन मंदिर में
मस्ती की एक टोली आई।।
होली आई होली आई।।