तू जिंदगी !
दर्द भरे आसमान सी,
मुसीबतें काले बादल है,
मगर मैं ठहरा!
हौसलों के रॉकेट सा ,
चीरता मेघों को जाऊंगा,
जिंदगी तेरे आसमान को
छलनी करता ,उभर जाऊंगा।
———मोहन सिंह “मानुष”
तू जिंदगी !
दर्द भरे आसमान सी,
मुसीबतें काले बादल है,
मगर मैं ठहरा!
हौसलों के रॉकेट सा ,
चीरता मेघों को जाऊंगा,
जिंदगी तेरे आसमान को
छलनी करता ,उभर जाऊंगा।
———मोहन सिंह “मानुष”