शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता !
क्या कहूँ उन बहरों से
इस दिल की बात..
बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य
शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता !
क्या कहूँ उन बहरों से
इस दिल की बात..
बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य