शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता ! क्या कहूँ उन बहरों से इस दिल की बात.. बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य

आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार। तिल को गुड़ से मिलायेगें, दही को छक कर खायेगें। नही होगा किसी से शिकवा-शिकायत, दिल को पतंग सा आसमान में उड़ायेगें। सूर्य नरायण का दर्शन रोज होगा, भक्त […]

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है […]

मन की पतंग को भी ऐसे उड़ने दे! की ना कोई उसे बंद, न कोई उसे उड़ा सके! मदमस्त, मनमौजी हवा के जैसे चाहे जहां उड़ान भर सके! ख़ुशी मिले उसे जहां वहीं वह अपना […]

आसमान का मौसम बदला बिखर गई चहुँओर पतंग। इंद्रधनुष जैसी सतरंगी नील गगन की मोर पतंग। मुक्त भाव से उड़ती ऊपर लगती है चितचोर पतंग। बाग तोड़कर, नील गगन में करती है घुड़दौड़ पतंग। पटियल, […]

त्यौहारों का देश हमारा, पर्व अनेक हम मनाते है हर उत्सव में संदेश अनेक है, विश्व को हम बतलाते हैं अब पौष मास में निकल धनु से, मकर में सूरज आया है और संग अपने […]

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठे चली थी अप्सरा संग करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके […]

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठ चली थी अप्सरा संघ करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके […]

जैसे जैसे मकर संक्रान्ति के दिन करीब आते हैं हर जगह पतंग! हर जगह पतंग! ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं नीले आसमान पर, एकमात्र खिलौना सबको मंत्रमुग्ध कर देते हैं हम सभी […]