कभी बादलों से
कभी बिजलिओं से
बनती है सरगम
कलकल बहते पानी
चलती हवाओं से
बनती है सरगम
इठलाती घूमती
बेटियां होती झंकार
बनती है सरगम
अपनी साँसें भी
जब सुर में हो
बनती है सरगम
कुछ यादें भी
होकर मधुर
बनती है सरगम
किसी साज़ का दर्द
खुद सा लगे तब
बनती है सरगम
राजेश’अरमान’
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