जख़्म दे रहे है,दवा देने वाले।

जख़्म दे रहे है ,दवा देने वाले।
गुनाह कर रहे है,सजा देने वाले।।
,
चिरागों की हस्ती,मिटती नहीं है।
सुन लो तुफानो को,पता देने वाले।।
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अभी मैं हूँ तनहा ,कल क्या रहूँगा।
महफिल से अपनी,उठा देने वाले।।
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मुझे मेरी मंजिल अब,दिखने लगी है।
कर दो निगाह मुझपे,हवा देने वाले।।
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सदिया है गुजरी,न आहट है कोई।
कहाँ तुम छिपे हो ऐ,जुबा देने वाले।।
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लफ्ज़ो को मेरे है ,सभी का सहारा ।
वरना भँवर थे कई,डुबा देने वाले।।
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अभी तक थे साहिल,हम भी वहम में।
बहुत शुक्रिया मुझको,दगा देने वाले।।
@@@@RK@@@@

Comments

3 responses to “जख़्म दे रहे है,दवा देने वाले।”

  1. Panna Avatar

    बहुत खूब..बधाई

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

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