ग़ज़ल

हादसा

तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। आवाज तुमने भी दिया नहीं, वरना मैं तो ठहरने वाला था। ख़ैर, जहां भी रहो खुश रहो, जिंदगी नाम तेरे करने वाला था। देवेश साखरे ‘देव’ »

नज़रे-करम

मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर। यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर। तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से, अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर। न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे, तेरी तलाश कर बस ख़तम मुझ पर। तोड़ दे गुरूर मेरा, गर तुझे लगता है, पर ना तोड़ अपनी क़लम मुझ पर। एक तू ही है, नहीं कोई और जिंदगी में, आज़मा ले, पर ना कर वहम मुझ पर। देवेश साखरे ‘देव’ »

तुम पास नहीं

वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब। मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब। जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी, तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब। सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं, महसूस होता है, मैं कितना हूं गरीब। या खुदा, ये इल्तज़ा करता है ‘देव’, वस्ले-सनम की सुझाओं कोई तरकीब। देवेश साखरे ‘देव’ »

अफ़सोस

किसी को देख, ना कर अफ़सोस । यूँ ना अपनी किस्मत को तू कोस । भले ही तन से नहीं हैं हम पास, भले ही ना ले सकूँ तुझे आगोश । पर मन तो एक दूजे के पास ही है, दिल की सदा सुन, ज़ुबां है ख़ामोश। ख़ुदा ने एक दूजे के लिए ही बनाया, आंखें मूंद, नज़र आएगी फ़िरदौस। देवेश साखरे ‘देव’ सदा- आवाज़, फ़िरदौस- स्वर्ग »

अमन चैन न हो

हिन्दी गजल- अमन चैन न हो सियासत कैसी जिसमे अमन चैन ना हो | साजिस ऐसी जहा भाई से भाई प्रेम ना हो | समझते है हम सब जिसे मसीहा अपना | लगे धारा एक सौ चौवालिस जुलूस बैन ना हो | चमकाने सियासत किस हद तक जाएँगे | आलाप बेसुरा राग जिसमे कोई धुन ना हो | सही को बताकर गलत हासिल होगा ना कुछ | बनेगा कैसे रहनुमा जिसमे कोई गुण ना हो | लड़वाकर भाई से भाई को तुम भी ना बचोगे | खुलेगा नहीं खाता कुर्सी अच्छा सगुण ना हो ... »

क्या लीजिएगा

कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा। दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा। तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं, फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा। मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम, नाम मेरा भी तेरी ज़ुबाँ लीजिएगा। डूब ना जाऊँ कहीं गम के पैमाने में, जाम आँखों से छलका लीजिएगा। खो ना जाऊँ ज़हाँ की भीड़ में कहीं, अपनी आगोश में समा लीजिएगा। ‘देव’ जीना मरना रख छोड़ा हाथ तेरे, गर साथ जीना हो तो बचा लीजिएगा। देवेश ... »

गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला, ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

तिजारत बन गई है

तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते कभी, आज दौलत ही लोगों की इबादत बन गई है। धधक रहा मुल्क, कुछ आग मेरे सीने में भी, दहशतगर्दों का गुनाह हिक़ारत बन गई है। यहाँ कौन सुने दुहाई, कहाँ मिलेगी रिहाई, ज़ेहन ख़ुद-परस्ती की हिरासत बन गई है। देवेश साखरे ‘देव’... »

पूस की रात

फकीर बन तेरे दर पर आया हूं एक मुट्ठी इश्क बक्शीश में दे देना आशिक समझ दर से खाली ना भेजना अमीर हो तुम चंद सांसे उधार दे देना किस्मत की लकीरें हैं जुड़ी तुझ संग ख्वाहिशों से भरी है झोली चंद आरजू दे देना दुआओं में तुमको ही है मांगा सनम कुछ चंद लम्हों का एहसास भर दे देना दिल- ए- मरीज हूं तेरी जुस्तजू का जानां रहमों करम ना सही इश्क- ए- दर्द दे देना पूस की रात में सर्द हवाओं के अलाव में बस एक शाम तुम अप... »

ज़िन्दगी रंगीन हो जाता

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या यकीन हो जाता। कुसूर बस इतना था, मैंने भला चाहा उसका, काश ज़माने की तरह, मैं भी ज़हीन हो जाता। तोहमतें मुझ पर सभी ने, लाख लगाई लेकिन, ज़माने की सुनता गर मैं, तो गमगीन हो जाता। नशे में जहाँ है, मैं भी गुज़रा हूँ, उन गलियों से, सम्भल गया व... »

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