ग़ज़ल

राह भूल सी गई है हमको

राह भूल सी गई है हमको जो छोड़ आओ, तो बात बने मंज़िल की सरहद पर दीया जो छोड़ आओ, तो बात बने मेरी तेरी या उसकी बातें जो छोड़ आओ, तो बात बने ढाई आखर हर देहरी पर जो छोड़ आओ,तो बात बने »

हिन्दी गजल

गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल हमेशा उछलता रहा।। गैर की है दुनिया में तेरी खुशी ,फिर तेरा मन मेरे मन को काहे लपकता रहा। जरा बचके निकलना ‘विनयचंद ‘यहाँ प्यार की राह अश्कों से धधकता रहा।। »

क्या हुआ है शहर को आख़िर

आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को आख़िर . मजहबी क्यों सियासत करके , घोलते हो ज़हर को आख़िर . जिस्म से दूर रहकर भरसक , रूह तड़पी सजर को आख़िर . ज़िन्दगी का हिसाब क्या दें , जिंदगी भर बसर को आख़िर . ऐ ज़मानों वफ़ा मत परखो , फैशनों में असर को आख़िर . खामखाँ प्यार करके ‘रकमिश’ , रौंद बैठे जिगर को आ... »

Maatam Manaiye

दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए »

रुबाई

कभी सोचा ना हो वह काम हो जाता है, जो करीब है वह दूर चला जाता है। मासूम सा चेहरा इन नाज़ुक-ए- हथेलियों से, हिना का रंग-चंद अश्कों से उतर जाता है। फरेब करने वाले खुश रहते हैं नसीहत से, ईमान ताउम्र का गम खरीद लाता है। ना कुछ पास था बस सच्ची मोहब्बत थी, अब तो प्यार करने वाला भी बेईमान नजर आता है। ना सोंच पास है जो कल भी नजर आएगा, साया है करीब आके बड़ी दूर चला जाता है। जो लब-ए- रुखसार बोलने में थर-थराते... »

हादसा

तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। आवाज तुमने भी दिया नहीं, वरना मैं तो ठहरने वाला था। ख़ैर, जहां भी रहो खुश रहो, जिंदगी नाम तेरे करने वाला था। देवेश साखरे ‘देव’ »

नज़रे-करम

मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर। यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर। तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से, अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर। न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे, तेरी तलाश कर बस ख़तम मुझ पर। तोड़ दे गुरूर मेरा, गर तुझे लगता है, पर ना तोड़ अपनी क़लम मुझ पर। एक तू ही है, नहीं कोई और जिंदगी में, आज़मा ले, पर ना कर वहम मुझ पर। देवेश साखरे ‘देव’ »

तुम पास नहीं

वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब। मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब। जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी, तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब। सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं, महसूस होता है, मैं कितना हूं गरीब। या खुदा, ये इल्तज़ा करता है ‘देव’, वस्ले-सनम की सुझाओं कोई तरकीब। देवेश साखरे ‘देव’ »

अफ़सोस

किसी को देख, ना कर अफ़सोस । यूँ ना अपनी किस्मत को तू कोस । भले ही तन से नहीं हैं हम पास, भले ही ना ले सकूँ तुझे आगोश । पर मन तो एक दूजे के पास ही है, दिल की सदा सुन, ज़ुबां है ख़ामोश। ख़ुदा ने एक दूजे के लिए ही बनाया, आंखें मूंद, नज़र आएगी फ़िरदौस। देवेश साखरे ‘देव’ सदा- आवाज़, फ़िरदौस- स्वर्ग »

अमन चैन न हो

हिन्दी गजल- अमन चैन न हो सियासत कैसी जिसमे अमन चैन ना हो | साजिस ऐसी जहा भाई से भाई प्रेम ना हो | समझते है हम सब जिसे मसीहा अपना | लगे धारा एक सौ चौवालिस जुलूस बैन ना हो | चमकाने सियासत किस हद तक जाएँगे | आलाप बेसुरा राग जिसमे कोई धुन ना हो | सही को बताकर गलत हासिल होगा ना कुछ | बनेगा कैसे रहनुमा जिसमे कोई गुण ना हो | लड़वाकर भाई से भाई को तुम भी ना बचोगे | खुलेगा नहीं खाता कुर्सी अच्छा सगुण ना हो ... »

क्या लीजिएगा

कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा। दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा। तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं, फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा। मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम, नाम मेरा भी तेरी ज़ुबाँ लीजिएगा। डूब ना जाऊँ कहीं गम के पैमाने में, जाम आँखों से छलका लीजिएगा। खो ना जाऊँ ज़हाँ की भीड़ में कहीं, अपनी आगोश में समा लीजिएगा। ‘देव’ जीना मरना रख छोड़ा हाथ तेरे, गर साथ जीना हो तो बचा लीजिएगा। देवेश ... »

गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला, ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

तिजारत बन गई है

तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते कभी, आज दौलत ही लोगों की इबादत बन गई है। धधक रहा मुल्क, कुछ आग मेरे सीने में भी, दहशतगर्दों का गुनाह हिक़ारत बन गई है। यहाँ कौन सुने दुहाई, कहाँ मिलेगी रिहाई, ज़ेहन ख़ुद-परस्ती की हिरासत बन गई है। देवेश साखरे ‘देव’... »

पूस की रात

फकीर बन तेरे दर पर आया हूं एक मुट्ठी इश्क बक्शीश में दे देना आशिक समझ दर से खाली ना भेजना अमीर हो तुम चंद सांसे उधार दे देना किस्मत की लकीरें हैं जुड़ी तुझ संग ख्वाहिशों से भरी है झोली चंद आरजू दे देना दुआओं में तुमको ही है मांगा सनम कुछ चंद लम्हों का एहसास भर दे देना दिल- ए- मरीज हूं तेरी जुस्तजू का जानां रहमों करम ना सही इश्क- ए- दर्द दे देना पूस की रात में सर्द हवाओं के अलाव में बस एक शाम तुम अप... »

ज़िन्दगी रंगीन हो जाता

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या यकीन हो जाता। कुसूर बस इतना था, मैंने भला चाहा उसका, काश ज़माने की तरह, मैं भी ज़हीन हो जाता। तोहमतें मुझ पर सभी ने, लाख लगाई लेकिन, ज़माने की सुनता गर मैं, तो गमगीन हो जाता। नशे में जहाँ है, मैं भी गुज़रा हूँ, उन गलियों से, सम्भल गया व... »

नही मिलते

ये रास्तें है कैसे हमसफ़र नही मिलते, छूट गए जो पीछे उम्र भर नही मिलते! सूख चूके है उनके दीदार के इंतजार में, हरे-भरे अब ऐसे शजर नही मिलते! तार-तार होते रिश्तों पर खड़ी दीवार हो गई, मोहब्बत हो जहां अब ऐसे घर नही मिलते! एक दूजे की मुसीबत में काम आए कोई, दरिया दिल लोग अब मगर नही मिलते! मिल जाये ठिकाना इस उखड़ती सांस को, न गांव मिलते है अब और शहर नही मिलते! वक्त की भीड़ में न जाने रातें कहाँ खो गई, चैन की... »

कहीं खामोश लम्हा है

कहीं खामोश लम्हा है,कहीं ये शोर कैसा है, कहीं पर शाम मातम की,ये सुख का भोर कैसा है! कहीं मासूम जलते है ,पिघलते मोम के जैसे, सियासत का कहीं झगड़ा,बढ़ा हर ओर कैसा है! कहीं दुत्कार, नफरत है,कहीं विषदार ईर्ष्या है, दिखावे का कहीं देखों,धुँआ घनघोर कैसा है! कहीं जज्बात जलता है,हमारा शुष्क पत्तों सा, कहीं रोना कहीं हंसना,दिखाना चोर कैसा है! बड़ा अफसोस है मुझको,ये ताकत खो रहे है हम, बना है खून अब पानी, ये खु... »

मार गई मुझे

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल की बातें, पर तेरे दोस्तों की, जमाअत मार गई मुझे। तेरी नज़रें बहुत कुछ कहना चाही मगर, मेरी नादानी, मेरी हिमाक़त मार गई मुझे। दिल चाहता है तेरी धड़कने महसूस करना, गले में तेरी बाहों की हिरासत मार गई मुझे। देवेश साखरे &#... »

हम मिलें

तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें , बहा लाए , वहीं , वक़्त फिर से , बिछड़ी कश्ती से हम, किनारों पे मिलें , हों , रस्म-ए-दुनिया , से रिहा हम-तुम , साथ गुलशन में जब , बहारों में खिलें , छोड़ जाए , ये ज़िक्र , हीना की खुशबू , फूल जब-जब , तेरी किताबों में मिलें , तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें । »

Aye Sanam

Aye sanam mujko rulane ki, zarurat kya thi Tumko jaana hi tha to aane ki, zarurat kya thi mujko kehthe the ki, tum hi meri zindagi ho phir tumko ye zamane ki zarurat kya thi By- Abdul sattar Najmi »

Sharaab

Ghol kar Shishe me pyaar peene de Thand bahuth hai cigaar peene de Na my masjid me na mandir me baitha hun Tere dar pe paada hun yaar peene de BY- Abdul Sattar Najmi »

मेरे बस की बात नहीं

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत, पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं। अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो, किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं। दुनिया से दिल भर चुका मेरा, अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। देवेश साखरे ̵... »

इस प्यार में

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का, जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में। ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें, मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

मेरी रूह

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास, हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है। तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा, तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है। मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में, टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख़ुदा पर यकीं

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में, खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है। नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई, किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है। दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने, बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है। देवेश साखरे ‘देव’ तलातु... »

सजा ना सकूंगा

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा। अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ, गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा। देवेश साखरे ‘देव’ »

सर्द रातें

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की, पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है। किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता, देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है। रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर, खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है। देवेश स... »

प्यार चाहिए

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से जिंदगी का चमन है सूना, मुझे खिजां नहीं बहार चाहिए। देवेश साखरे ‘देव’ »

तेरा ही ज़िक्र

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में गर तू हो, ज़रूरत नहीं ज़िक्र की, पर लगता कुछ तो कमी है, मेरी हज़्म में। यहाँ चेहरे तो बहुत से हैं, पर हर चेहरे में, तेरा ही चेहरा नज़र आता, मेरी चश्म में। सात फेरे हो, या फिर हो जश्ने-ज़िन्दगी, तू साथ हो मेरे, ज़िन्दगी की हर रस्म ... »

उतरते साहिल पर शाम का सूरज

उतरते साहिल पर शाम का सूरज जवां है हाथ छूट गए लेकिन यादें रवां है इतनी फुरसत कहाँ की लौट कर आयें खैर मसाफ़त से इश्क़ का तजुर्बा बढ़ा है मेरे बहकते कदमों में शराब नही शामिल अंजाम रब्त का सर पर चढ़ा है कोई इन्तिजाम ही नही तुम्हे भुलाने का जो चेहरा देखा करूं तू ही तू रवां है »

गिला यूं मिलेगा

सोचा था किसने सिला यूं मिलेगा। मुहब्बत में मुझको गिला यूं मिलेगा।। कसमे वफा को जो तोड़ जाए तड़पते हुए दिल जो छोड़ जाए सह न सके जो हवा का एक झोंका कागज का मुझको किला यूं मिलेगा।। मुहब्बत में…. »

तेरी अंगड़ाई

चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई। होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की, जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते, सहरे-नींदें चुरा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। पायल की छन-छन, चूड़ियों की खन-खन, सब्रो-सुकूं छीन ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। वस्ले-सनम से पहले ही कहीं ‘देव’, जां न ले ले मेरी, तेरी अंगड़ाई।। देवेश साखरे ‘देव... »

आशियाँ

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा गई तिश्नगी मेरी, सागर किनारे भी प्यासा खड़ा रह गया। आरज़ू नहीं, आसमां से भी ऊँचे कद की, ज़मीं का ‘देव’, ज़मीं से जुड़ कर रह गया। देवेश साखरे ‘देव’ »

बहार- ए-गुलशन बुला रहा है

चले भी आओ मनमीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है। सजाई महफिल है प्रीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। नजरों के आगे तुम्हारा डेरा धड़कनों में समाए हुए हो। जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने काहे को देरी लगाए हुए हो। रस्म -ए-वफा के संगीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। »

मेरे महबूब

मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है। मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है। चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया, अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है। ऐ चाँद, तेरी चाँदनी की जरूरत नहीं मुझे, मेरे महबूब के नूर से सारा समाँ नहाया है। कोशिशें लाख कर ली, नज़रें हटती नहीं, तुमने हुस्नो-नज़ाकत कुछ ऐसा पाया है। बेशक हमने, कमाई नहीं दौलत बेशुमार, तेरी मोहब्बत का साया, मेरा सरमाया है। देवेश साखरे ‘द... »

परेशाँ क्यूँ है

दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है। खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है। इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं, तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है। इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का, यकीं तो रख, ख़ुद पर शुबहा क्यूँ है। ज़रूरी नहीं, पूरा हो इश्क सभी का, गम के प्याले में तू फिर डूबा क्यूँ है। वो भी तुम्हें चाहे, ये ज़रूरी तो नहीं, एक तरफ़ा प्यार से तू ख़फा क्यूँ है। शायद मंजिल तेरी कुछ और तय हो, बजा सोचा ज... »

तेरे असूल थे या बदलते दौर थे

तेरे असूल थे या फिर वो बदलते दौर थे . मेरे लिए जो और थे गैरों के लिए जो और थे . जिनको उठाने के लिए मिली मुझे सजा ए मौत , आज कहती हैं अदालतें मुद्दे वो काबिल ए गौर थे . मेरे लिए ही थीं वो क्या मर्यादाओं की दुहाइयाँ , जिनके लिए हया छोड़ दी वो कौन से चितचोर थे . कुछ भी कहो पर”राज़”यह अब हो रहा है आम यूँ , कोई दोष न इस तूफां का था घर गरीबों के कमजोर थे . »

ख्वाब

खुली आँखों का ख्वाब जरूर मुकम्मल होता है। नींद में दिखा ख्वाब तो, याद भी ना कल होता है। ज़िद है, ख्वाब पूरे होंगे अपने एक दिन यकीनन, खुद पर यकीन रख, फिर मन क्यों बेकल होता है। भाव का कद्र तो उसे पता, जिसने अभाव देखा हो, उसके प्रभाव से ही दुनिया, उसका क़ायल होता है। घमासान जंग छिड़ी है, जिंदगी और मेरे दरम्यान, देखें कौन सूरमा होता है और कौन घायल होता है। आओ आज को जी भर जी लें, कल किसने देखा, आज को ... »

शायर

इश्क का दरिया जब ज़ेहन के समंदर से मिलता है। दिल के साहिल से टकरा, गज़ल बह निकलता है। हिज़्रे-महबूब का गम हो, या वस्ले-सनम की खुशी, ज़ेहन में अल्फ़ाज़ों का सैलाब उफनता, उतरता है। जिसने भी कभी इश्क किया, वो शायर ज़रूर हुआ, इश्क रब से करता है, या फिर महबूब से करता है। दिल से निकले जज़्बात, उनके दिल में उतर जाए, हो गई गज़ल, फिर ज़रूरी नहीं क़ाफ़िया मिलता है। देवेश साखरे ‘देव’ »

जां तक निसार हुआ

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ। हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ। हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में, क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक निसार हुआ। करते रहे हम, सारी उम्र बेपनाह मोहब्बत तुमसे, मेरी मोहब्बत का फिर भी ना, तुझे ऐतबार हुआ। कल तक जो थकते ना थे, लेते नाम हमारा, आज क्यों तुम्हारे वास्ते, ‘देव’ खतावार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

संगदिल हमराज

ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ। बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ। साथ निभाने का वादा करते थे कल तक, बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ। संगदिल कहूँ या फिर दिले-कातिल कहूँ, किस नाम पुकारूं, अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊँ। जो कल तक थे, मुझ बेजुबां की आवाज, फिर बुला सकूँ, वो आवाज़ कहाँ से लाऊँ। दिल जोड़ना, फिर तोड़ना, क्या फन तुम्हारा, करार दे दिल को, वो साज कहाँ से लाऊँ। छोड़ा बीच राह, यहीं तक था साथ हमार... »

गजल

तेरी सूरत सदा रहती नजरों के पास नाम हाथों पे लिखने से क्या फायदा? तुम रहते सदा मेरे दिल में प्रिये सामने आके मिलने से क्या फायदा? दिल जख्मों को सहता मेरा इस कदर अब जख्मों को गिनने से क्या फायदा? विनयचंद मुहब्बत के सागर में आ साहिल पे कंकर बीनने से क्या फायदा? »

कमी है कुछ तुम में

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब। सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब । किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया, सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब । कहते हैं तुमसे दोस्ती है, मोहब्बत तो नहीं, मुझे पाने के कैसे सजा डाले तुमने ख्वाब । कर दिया इनकार ‘देव’ कमी है कुछ तुम में, सोचा भी कैसे इकरारे-मोहब्बत तुमने जनाब । देवेश साखरे ‘देव’ »

सहारा तू ही साकी

आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है, अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है । हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया, खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही साथी है । आज दस्तकश वो कहते, अजनबी तुम हो कौन, कल जिन्हें ऐतराफ़ था, मैं चिराग़ तू ही बाती है । कुछ भी ना रही आरज़ू जिंदगी में, तेरे सिवाय, ना किसी शय का तलबगार, शराब तू ही भाती है । कोई रहगुज़र नहीं याद, मयकदा ही मेरी मंज़िल, गुज़रे ज... »

प्यार करके तो देखो

कभी दिल के करीब आकर तो देखो। प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो। लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन, किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो। ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम, कभी गाम-दर-गाम मिलाकर तो देखो। तुम हो हकीकत, तुम ही ख्वाब हो, ख्वाब हंसीन प्यार के, सजाकर तो देखो। थाम लेंगे ‘देव’ ता उम्र तुम्हारा हाथ, कभी प्यार का हाथ, बढ़ा कर तो देखो। देवेश साखरे ‘देव’ गाम-दर-गाम – कदम से... »

हाथों में तेरा हाथ

शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है । एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है । तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत, तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात है । गर तू शम्मअ है, तो मैं भी हूँ परवाना, बेशक बरसों पुराना, तेरा मेरा साथ है । कहते प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है, भीगे ‘देव’ के संग तू, प्यार की बरसात है । देवेश साखरे ‘देव’ »

मैं बदला नहीं

माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं। मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं। मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा, लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत नहीं। मैं कभी सूख जाऊँ या फिर कभी सैलाब लाऊँ, गहरा समंदर हूँ, मुझमें दरिया सी हरकत नहीं। शजर की झुकी डाल हूँ, पत्थर मारो या तोड़ लो, फल ही दूँगा, बदले में कुछ पाने की हसरत नहीं। आज कल मिलते हैं लोग, यहाँ बस मतलब से, बगैर मतलब मिलने की, ... »

तलाश

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ। सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही, भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ। सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है, अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ। यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ... »

अब होश ना रहे

ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला । फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला । करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई, बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला । जिसे ज़िंदगी समझा, उसने ही लूट ली जिंदगी, मेरी मुहब्बत का तूने, दिया है अच्छा सिला । बागबां ने ही उजाड़ कर रख दिया, खुद बाग, फिर ना कभी बहार आई, ना कोई गुल खिला । अब ना रही जिंदगी से कोई, जुस्तजू ना आरज़ू, खुद ‘देव’ माँगे ख़ुदारा बस मु... »

तलाश

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ। सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही, भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ। सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है, अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ। यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ... »

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