ग़ज़ल

मार गई मुझे

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल की बातें, पर तेरे दोस्तों की, जमाअत मार गई मुझे। तेरी नज़रें बहुत कुछ कहना चाही मगर, मेरी नादानी, मेरी हिमाक़त मार गई मुझे। दिल चाहता है तेरी धड़कने महसूस करना, गले में तेरी बाहों की हिरासत मार गई मुझे। देवेश साखरे &#... »

हम मिलें

तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें , बहा लाए , वहीं , वक़्त फिर से , बिछड़ी कश्ती से हम, किनारों पे मिलें , हों , रस्म-ए-दुनिया , से रिहा हम-तुम , साथ गुलशन में जब , बहारों में खिलें , छोड़ जाए , ये ज़िक्र , हीना की खुशबू , फूल जब-जब , तेरी किताबों में मिलें , तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें । »

Aye Sanam

Aye sanam mujko rulane ki, zarurat kya thi Tumko jaana hi tha to aane ki, zarurat kya thi mujko kehthe the ki, tum hi meri zindagi ho phir tumko ye zamane ki zarurat kya thi By- Abdul sattar Najmi »

Sharaab

Ghol kar Shishe me pyaar peene de Thand bahuth hai cigaar peene de Na my masjid me na mandir me baitha hun Tere dar pe paada hun yaar peene de BY- Abdul Sattar Najmi »

मेरे बस की बात नहीं

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत, पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं। अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो, किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं। दुनिया से दिल भर चुका मेरा, अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। देवेश साखरे ̵... »

इस प्यार में

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का, जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में। ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें, मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

मेरी रूह

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास, हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है। तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा, तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है। मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में, टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख़ुदा पर यकीं

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में, खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है। नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई, किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है। दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने, बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है। देवेश साखरे ‘देव’ तलातु... »

सजा ना सकूंगा

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा। अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ, गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा। देवेश साखरे ‘देव’ »

सर्द रातें

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की, पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है। किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता, देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है। रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर, खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है। देवेश स... »

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