ग़ज़ल

दीवाने

तलाशी जिस्म की खुलेआम दे दी। सब दिखाया पर दिल दिखाया नहीं। ढूढ़ते रहे हार के लौटना पड़ा सबको, जब हाथ लगाया दिल धड़काया नहीं। ढूंढते ढूंढते रात दिन हाथ से निकले, रूह में रहे वो हम ही को बताया नहीं। सबके सामने खुले आम जीते रहे हम, हमने तो सच किसी से छिपाया नहीं। उनकी यादों में दीवाने हुए इस कदर, आँखों को भिगाया राही सुखाया नहीं। राही अंजाना »

क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर

अब तो घर में भी रहना कारावास है क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर। देख विरयानी में भी है खिचड़ी का स्वाद क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।। क्यों अनजाना -सा लगता है अपना शहर क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर। बड़ी मुश्किल -सी लगती ज़िन्दगी वसर क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।। »

कोई एक दीवाना

मुद्दत बाद ए दोस्त भेजा उसने मेरे नाम इश्क़ ए पैगाम। गुजर गया वो जमाना कभी याद करते थे उनको सुबह शाम।। न मै बेवफा थी न वो बेवफा था बेवफा था ए ज़ुल्मी जमाना।। सोचा था मुकद्दर साथ देगा ए दोस्त निकला वह भी बेगाना।। कुदरत के तमाशा तो देखिए मै कहाँ आज वो कहाँ सूखे पत्तों पे मेंहदी के रंग चढाने चले है फिर कोई एक दीवाना।। »

जुस्तजू

आज की रात कयामत की रात है। गर तुम हो मेरे साथ तो जन्नत की बात है।। थी जुस्तजू तुम्हें पाने को मगर। क्या करू सब की अपनी मुकद्दर है।। डर है मुझे कहीं ए चिराग बुझ न जाए। इसलिए हवा के रुख बदलने का इरादा है।। »

बे-वफा

उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । हम तो बस उनके लिए छोटा सा महल बनाने में लग गए।। बने थे कभी वो मेरे दोस्त, मेरे हमदम, मेरे इब्तिदा । उनके मुस्कान को हम इश्क़ के सिलसिला समझने लग गए।। »

गलतफहमियों के बीज

गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते हैं जीने की उम्मीद खत्म हो चुकी है मगर जिंदा अभी हैं हम ये बात समझ ना आई! वो मुझे मुर्दा क्यों समझते हैं? दाग दर्पण में है चेहरे पर मेरे एक भी नहीं फ़क़त इतनी-सी बात वो क्यों नहीं समझते हैं उलझे हैं हम या हमारी जुल्फों में कई राज इस र... »

मौजूदा हालात पे ग़ज़ल

आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी से क्या मिला है आज तक सामना कर कीमती है जिंदगी बंद आँखों से कभी सुन सरगमें इक सुरीली बाँसुरी है जिंदगी दिल में हो उम्मीद की कोई किरन रौशनी ही रौशनी है जिंदगी हर घड़ी तैयार रहना ‘आरज़ू’ इम्तिहानों से भरी है जि... »

बेटियों पर एक ग़ज़ल

ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ से दुलार, भाई से प्यार और रब से अपने पिता की उजली दस्तार माँगती हैं है दिल में कितने सागर,सीने पे कितने पर्बत धरती के जैसा अपना, किरदार माँगती हैं आज़ाद हम सभी हैं, हिन्दोस्ताँ में फिर भी, क्यों ‘आरज़ू’ ये अपना अधिकार माँगती हैं... »

जिसे सर झुकाने की आदत नहीं है

जिसे सर झुकाने की आदत नहीं है उसे हर बशर से मोहब्बत नहीं है दुःखा दिल किसी का ख़ुशी मैं मनाऊँ मेरे दिल की ऐसी तो फ़ितरत नहीं है वो अपने किए पर पशेमां बहुत है नज़र भी मिलाने की हिम्मत नहीं है बहा आई दरिया में लख़्त ए जिगर को ज़माने से लड़ने की ताक़त नहीं है समझ आ चुका है ये रिश्तों का मतलब किसी आसरे की ज़रूरत नहीं है »

मेरे दिल का नज़राना

कभी मायूस होती हूँ कभी बेचैन होती हूँ मगर तेरी मोहब्बत में डूबी दिन-रैन होती हूँ, कभी बातें कभी यादें कभी तन्हाई में तुझको भुलाकर सब ओ मेरी जान सिर्फ तुझमें ही खोती हूँ । ——————————————————- मेरे दिल का नजराना मुबारक हो तुम्हें साहिब मेरे किस्से मेरे सपने मुबारक हो तुम्हें साहिब जो ना दे सके... »

कड़ाई से लड़ाई

आओ साथी करे हम कोरोना पे कड़ाई। यही से होगी हमारी भारत की लड़ाई ।। वार पे वार हम सहते गए,अब न सहेंगे । चलो चलें हम करे पीड़ितों की भलाई।। यही बनता है हमारा अपना परम धरम । इसी में छिपी है मानवता की सच्चाई ।। »

वफा से बे – वफा

माथे पे आज पसीना के बूंद आया है क्यों। जो कल तक थे हमारे आज अजनबी है क्यों।। दामन – ए – यार का जब साथ पकड़ा था मैने। हल्की मुस्कान से हम पर वार किए थे क्यों।। जन्म जन्म का वादा था साथ निभाने का । आज वादे को कबर में दफना के मुस्करा रहे है क्यों।। गैर के हाथों में है आज उनके नाजुक से हाथ। वफा के दिलासा दिलाने वाली तू बे-वफा बनी क्यों।। सोचा था सारी खुशियां तुम्हारे दामन में डाल दूँगा। ए ... »

ग़ज़ल

ग़ज़ल ——- दूरियां ,नज़दीकियां, खुशफहमियां तेरे साथ में, हम मिले ना थे कभी पर बह गए जज्बात में। 1. मौसमै अंदाज था कुछ खास था उस रात में, थे गिरफ्त में इश्क के उस बेवजह सी बात में। थी नहीं मंजूर हद …इश्क की बरसात में, दूरियां नजदीकियां खुशफहमियां तेरे साथ में…… 2. जब्बे सैलाबे मोहब्बत ले रहा उफान था, धड़कने बेकाबू थी दिल में अजब तूफ़ान था। तेरी आहट देती थी बस.. दिल को थ... »

इंसानियत के दुश्मन

जो इंसानियत की दुश्मन बन जाये, वो जमाअत कैसी। खुदा ने भी लानत भेजी होगी, इबादत की ये बात कैसी। खुद की नहीं ना सही, अपनों की तो परवाह कर लेते, जिन्हें अपनों की परवाह नहीं, दिलों में जज़्बात कैसी। जहाँ जंग छिड़ी मौत के खिलाफ, जिंदगी बचाने को, वहाँ मौत के तांडव की, फिर से नई शुरुआत कैसी। मौत किसी का नाम पूछ कर तो, दस्तक नहीं देती, ये कोई मजहबी खेल नहीं, फिर यह बिसात कैसी। जूझ रहे कई कर्मवीर, हमारी हि... »

आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा

पेश है आपकी खिदमत में:- गज़ल आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ ———————— दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा ————————– गज़ल सुना के सुलाये हैं मैनें जो एहसास उन्हें जगा लूँ या सुला दूँ है बड़ी उलझन ——————&... »

ग़ज़ल। सभी को मौत के डर ने ही..

आदाब सभी को मौत के डर ने ही ज़िंदा रक्खा है ख़ुदाया फिर भी ये इंसाँ इसी से डरता है हमारी साँस भी चलती उसी की मर्ज़ी से ही जहाँ में पत्ता भी उसकी रज़ा से हिलता है हमेशा आस का दीपक जला के रखना तुम अँधेरे रास्ते है, तू सफ़र पे निकला है वो सारे चल पड़े थे, तिश्नगी लिये अपनी किसी ने कह दिया सहरा में कोई दरिया है ज़मी पे अजनबी भी अजनबी नहीं होता बुलंदी पे जो है अक्सर अकेला होता है ये ज़िंदगी है, इसे नासमझ सा बन... »

राह भूल सी गई है हमको

राह भूल सी गई है हमको जो छोड़ आओ, तो बात बने मंज़िल की सरहद पर दीया जो छोड़ आओ, तो बात बने मेरी तेरी या उसकी बातें जो छोड़ आओ, तो बात बने ढाई आखर हर देहरी पर जो छोड़ आओ,तो बात बने »

हिन्दी गजल

गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल हमेशा उछलता रहा।। गैर की है दुनिया में तेरी खुशी ,फिर तेरा मन मेरे मन को काहे लपकता रहा। जरा बचके निकलना ‘विनयचंद ‘यहाँ प्यार की राह अश्कों से धधकता रहा।। »

क्या हुआ है शहर को आख़िर

आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को आख़िर . मजहबी क्यों सियासत करके , घोलते हो ज़हर को आख़िर . जिस्म से दूर रहकर भरसक , रूह तड़पी सजर को आख़िर . ज़िन्दगी का हिसाब क्या दें , जिंदगी भर बसर को आख़िर . ऐ ज़मानों वफ़ा मत परखो , फैशनों में असर को आख़िर . खामखाँ प्यार करके ‘रकमिश’ , रौंद बैठे जिगर को आ... »

Maatam Manaiye

दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए »

रुबाई

कभी सोचा ना हो वह काम हो जाता है, जो करीब है वह दूर चला जाता है। मासूम सा चेहरा इन नाज़ुक-ए- हथेलियों से, हिना का रंग-चंद अश्कों से उतर जाता है। फरेब करने वाले खुश रहते हैं नसीहत से, ईमान ताउम्र का गम खरीद लाता है। ना कुछ पास था बस सच्ची मोहब्बत थी, अब तो प्यार करने वाला भी बेईमान नजर आता है। ना सोंच पास है जो कल भी नजर आएगा, साया है करीब आके बड़ी दूर चला जाता है। जो लब-ए- रुखसार बोलने में थर-थराते... »

हादसा

तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। आवाज तुमने भी दिया नहीं, वरना मैं तो ठहरने वाला था। ख़ैर, जहां भी रहो खुश रहो, जिंदगी नाम तेरे करने वाला था। देवेश साखरे ‘देव’ »

नज़रे-करम

मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर। यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर। तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से, अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर। न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे, तेरी तलाश कर बस ख़तम मुझ पर। तोड़ दे गुरूर मेरा, गर तुझे लगता है, पर ना तोड़ अपनी क़लम मुझ पर। एक तू ही है, नहीं कोई और जिंदगी में, आज़मा ले, पर ना कर वहम मुझ पर। देवेश साखरे ‘देव’ »

तुम पास नहीं

वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब। मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब। जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी, तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब। सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं, महसूस होता है, मैं कितना हूं गरीब। या खुदा, ये इल्तज़ा करता है ‘देव’, वस्ले-सनम की सुझाओं कोई तरकीब। देवेश साखरे ‘देव’ »

अफ़सोस

किसी को देख, ना कर अफ़सोस । यूँ ना अपनी किस्मत को तू कोस । भले ही तन से नहीं हैं हम पास, भले ही ना ले सकूँ तुझे आगोश । पर मन तो एक दूजे के पास ही है, दिल की सदा सुन, ज़ुबां है ख़ामोश। ख़ुदा ने एक दूजे के लिए ही बनाया, आंखें मूंद, नज़र आएगी फ़िरदौस। देवेश साखरे ‘देव’ सदा- आवाज़, फ़िरदौस- स्वर्ग »

अमन चैन न हो

हिन्दी गजल- अमन चैन न हो सियासत कैसी जिसमे अमन चैन ना हो | साजिस ऐसी जहा भाई से भाई प्रेम ना हो | समझते है हम सब जिसे मसीहा अपना | लगे धारा एक सौ चौवालिस जुलूस बैन ना हो | चमकाने सियासत किस हद तक जाएँगे | आलाप बेसुरा राग जिसमे कोई धुन ना हो | सही को बताकर गलत हासिल होगा ना कुछ | बनेगा कैसे रहनुमा जिसमे कोई गुण ना हो | लड़वाकर भाई से भाई को तुम भी ना बचोगे | खुलेगा नहीं खाता कुर्सी अच्छा सगुण ना हो ... »

क्या लीजिएगा

कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा। दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा। तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं, फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा। मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम, नाम मेरा भी तेरी ज़ुबाँ लीजिएगा। डूब ना जाऊँ कहीं गम के पैमाने में, जाम आँखों से छलका लीजिएगा। खो ना जाऊँ ज़हाँ की भीड़ में कहीं, अपनी आगोश में समा लीजिएगा। ‘देव’ जीना मरना रख छोड़ा हाथ तेरे, गर साथ जीना हो तो बचा लीजिएगा। देवेश ... »

गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला, ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

तिजारत बन गई है

तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते कभी, आज दौलत ही लोगों की इबादत बन गई है। धधक रहा मुल्क, कुछ आग मेरे सीने में भी, दहशतगर्दों का गुनाह हिक़ारत बन गई है। यहाँ कौन सुने दुहाई, कहाँ मिलेगी रिहाई, ज़ेहन ख़ुद-परस्ती की हिरासत बन गई है। देवेश साखरे ‘देव’... »

पूस की रात

फकीर बन तेरे दर पर आया हूं एक मुट्ठी इश्क बक्शीश में दे देना आशिक समझ दर से खाली ना भेजना अमीर हो तुम चंद सांसे उधार दे देना किस्मत की लकीरें हैं जुड़ी तुझ संग ख्वाहिशों से भरी है झोली चंद आरजू दे देना दुआओं में तुमको ही है मांगा सनम कुछ चंद लम्हों का एहसास भर दे देना दिल- ए- मरीज हूं तेरी जुस्तजू का जानां रहमों करम ना सही इश्क- ए- दर्द दे देना पूस की रात में सर्द हवाओं के अलाव में बस एक शाम तुम अप... »

ज़िन्दगी रंगीन हो जाता

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या यकीन हो जाता। कुसूर बस इतना था, मैंने भला चाहा उसका, काश ज़माने की तरह, मैं भी ज़हीन हो जाता। तोहमतें मुझ पर सभी ने, लाख लगाई लेकिन, ज़माने की सुनता गर मैं, तो गमगीन हो जाता। नशे में जहाँ है, मैं भी गुज़रा हूँ, उन गलियों से, सम्भल गया व... »

नही मिलते

ये रास्तें है कैसे हमसफ़र नही मिलते, छूट गए जो पीछे उम्र भर नही मिलते! सूख चूके है उनके दीदार के इंतजार में, हरे-भरे अब ऐसे शजर नही मिलते! तार-तार होते रिश्तों पर खड़ी दीवार हो गई, मोहब्बत हो जहां अब ऐसे घर नही मिलते! एक दूजे की मुसीबत में काम आए कोई, दरिया दिल लोग अब मगर नही मिलते! मिल जाये ठिकाना इस उखड़ती सांस को, न गांव मिलते है अब और शहर नही मिलते! वक्त की भीड़ में न जाने रातें कहाँ खो गई, चैन की... »

कहीं खामोश लम्हा है

कहीं खामोश लम्हा है,कहीं ये शोर कैसा है, कहीं पर शाम मातम की,ये सुख का भोर कैसा है! कहीं मासूम जलते है ,पिघलते मोम के जैसे, सियासत का कहीं झगड़ा,बढ़ा हर ओर कैसा है! कहीं दुत्कार, नफरत है,कहीं विषदार ईर्ष्या है, दिखावे का कहीं देखों,धुँआ घनघोर कैसा है! कहीं जज्बात जलता है,हमारा शुष्क पत्तों सा, कहीं रोना कहीं हंसना,दिखाना चोर कैसा है! बड़ा अफसोस है मुझको,ये ताकत खो रहे है हम, बना है खून अब पानी, ये खु... »

मार गई मुझे

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल की बातें, पर तेरे दोस्तों की, जमाअत मार गई मुझे। तेरी नज़रें बहुत कुछ कहना चाही मगर, मेरी नादानी, मेरी हिमाक़त मार गई मुझे। दिल चाहता है तेरी धड़कने महसूस करना, गले में तेरी बाहों की हिरासत मार गई मुझे। देवेश साखरे &#... »

हम मिलें

तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें , बहा लाए , वहीं , वक़्त फिर से , बिछड़ी कश्ती से हम, किनारों पे मिलें , हों , रस्म-ए-दुनिया , से रिहा हम-तुम , साथ गुलशन में जब , बहारों में खिलें , छोड़ जाए , ये ज़िक्र , हीना की खुशबू , फूल जब-जब , तेरी किताबों में मिलें , तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें । »

Aye Sanam

Aye sanam mujko rulane ki, zarurat kya thi Tumko jaana hi tha to aane ki, zarurat kya thi mujko kehthe the ki, tum hi meri zindagi ho phir tumko ye zamane ki zarurat kya thi By- Abdul sattar Najmi »

Sharaab

Ghol kar Shishe me pyaar peene de Thand bahuth hai cigaar peene de Na my masjid me na mandir me baitha hun Tere dar pe paada hun yaar peene de BY- Abdul Sattar Najmi »

मेरे बस की बात नहीं

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत, पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं। अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो, किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं। दुनिया से दिल भर चुका मेरा, अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। देवेश साखरे ̵... »

इस प्यार में

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का, जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में। ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें, मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

मेरी रूह

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास, हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है। तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा, तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है। मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में, टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख़ुदा पर यकीं

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में, खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है। नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई, किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है। दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने, बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है। देवेश साखरे ‘देव’ तलातु... »

सजा ना सकूंगा

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा। अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ, गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा। देवेश साखरे ‘देव’ »

सर्द रातें

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की, पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है। किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता, देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है। रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर, खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है। देवेश स... »

प्यार चाहिए

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से जिंदगी का चमन है सूना, मुझे खिजां नहीं बहार चाहिए। देवेश साखरे ‘देव’ »

तेरा ही ज़िक्र

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में गर तू हो, ज़रूरत नहीं ज़िक्र की, पर लगता कुछ तो कमी है, मेरी हज़्म में। यहाँ चेहरे तो बहुत से हैं, पर हर चेहरे में, तेरा ही चेहरा नज़र आता, मेरी चश्म में। सात फेरे हो, या फिर हो जश्ने-ज़िन्दगी, तू साथ हो मेरे, ज़िन्दगी की हर रस्म ... »

उतरते साहिल पर शाम का सूरज

उतरते साहिल पर शाम का सूरज जवां है हाथ छूट गए लेकिन यादें रवां है इतनी फुरसत कहाँ की लौट कर आयें खैर मसाफ़त से इश्क़ का तजुर्बा बढ़ा है मेरे बहकते कदमों में शराब नही शामिल अंजाम रब्त का सर पर चढ़ा है कोई इन्तिजाम ही नही तुम्हे भुलाने का जो चेहरा देखा करूं तू ही तू रवां है »

गिला यूं मिलेगा

सोचा था किसने सिला यूं मिलेगा। मुहब्बत में मुझको गिला यूं मिलेगा।। कसमे वफा को जो तोड़ जाए तड़पते हुए दिल जो छोड़ जाए सह न सके जो हवा का एक झोंका कागज का मुझको किला यूं मिलेगा।। मुहब्बत में…. »

तेरी अंगड़ाई

चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई। होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की, जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते, सहरे-नींदें चुरा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। पायल की छन-छन, चूड़ियों की खन-खन, सब्रो-सुकूं छीन ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। वस्ले-सनम से पहले ही कहीं ‘देव’, जां न ले ले मेरी, तेरी अंगड़ाई।। देवेश साखरे ‘देव... »

आशियाँ

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा गई तिश्नगी मेरी, सागर किनारे भी प्यासा खड़ा रह गया। आरज़ू नहीं, आसमां से भी ऊँचे कद की, ज़मीं का ‘देव’, ज़मीं से जुड़ कर रह गया। देवेश साखरे ‘देव’ »

बहार- ए-गुलशन बुला रहा है

चले भी आओ मनमीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है। सजाई महफिल है प्रीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। नजरों के आगे तुम्हारा डेरा धड़कनों में समाए हुए हो। जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने काहे को देरी लगाए हुए हो। रस्म -ए-वफा के संगीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। »

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