माना की तेरे अपनों से बेहतर नहीं हूँ मैं।
मुझे कभी छूकर के देखो पत्थर नहीं हूँ मैं।।
@@@@RK@@@@
माना की तेरे अपनों से बेहतर नहीं हूँ मैं। मुझे कभी छूकर के देखो पत्थर नहीं हूँ मैं
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One response to “माना की तेरे अपनों से बेहतर नहीं हूँ मैं। मुझे कभी छूकर के देखो पत्थर नहीं हूँ मैं”
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वाह बहुत सुंदर
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