जिस दिन से

जिस दिन से तुम्हारी नसीली आँख देख लिया ;मैने!
लड़खराये –डगमगाये चलता हूँ।।
चाहे चाय खाना से निकलु,,
या तुम्हारे गली से निकलु।
डगमगाये फिरता हूँ।।
ज्योति

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