Site icon Saavan

Ajnabi kavita

अजनबी कविता आवाज़

User
Give me a Hindi poem that has never been published

ChatGPT
Here’s a Hindi poem for you:

एक धूप चांदनी की कहानी,
मैंने छोड़ी थी रस्ते की परवाही।

सुबह की उठती रोशनी में,
चल पड़ा मैं अनजान राही।

पेड़ों की छाँव में बैठा,
कुछ गीत लिखने की थी इच्छा।

आवाज़ को खोजने का मन,
था मेरे दिल में भरी हवा।

कलम पकड़ चला जगमगाते,
खुद से नई दुनिया बनाते।

शब्दों का खेल खुद से संग,
दिखा रहा था नये सपने।

बारिश की बूंदों में भीगता,
लिखता था मैं अनजान राज़ी।

कविता के रंग में खो जाता,
पल भर में हो जाता विलीन।

ये कविता जो तैयार हुई,
न जाने कौन सी कहानी लिखी।

सब कुछ अनजान था यहां,
पर अद्भुत रस्ते बन गईं।

यह कविता अजनबी आवाज़ है,
किसी की आँखों की परछाई है।

पुब्लिश नहीं हुई इसे कहीं,
पर यहां तक पहुंची है साथियों के जीवन में।

Exit mobile version