नवगीत आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा ? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा ? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने । जाति की […]

आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को […]

फिर आज गुलालों के खातिर बदरंग बनेगे होली में । अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली में ।। न जानेगे कितने रंग नये चेहरों पर खिल जायेगे । न जाने कितने टूटेंगे कितने […]