Author: Abhishek Sharma

  • यह इश्क़ है।

    यह इश्क़ है।

    चंचल , अल्हड़ , बेपरवाह , बेफिक्र ,
    यह इश्क़ है।
    प्रीतम क़े जाने पर  जो  प्रेयसी को कर दे बाबरा ,
    यह इश्क़ है।
    जिसके दम  पर मीरा जहर का प्याला बेहिचक पी गई ,
    यह इश्क़ है।
    नटराज और माँ शक्ति का जिसने मिलन है करवाया ,
    यह इश्क़ है।
    तरसती रहती है धरती बादलों की उस एक बूँद के लिए ,
    यह इश्क़ है।
    उसकी इक आवाज सुनने के लिए जो बेचैन है कर देता ,
    यह इश्क़ है।
    जो सारे ब्रह्माण्ड को है रच गया ,
    यह इश्क़ है ,
    चंचल , अल्हड़ , बेपरवाह , बेफिक्र ,
    यह इश्क़ है।
    –  अभिषेक शर्मा

  • सईयां की डोर

    रख दो तुम मेरे लिए दुनिया भर के सोने-चांदी ,
    पर मैं ना छोड़ू अपने सईयां की डोर।

    प्रेम के मंदिर में यह पुजारन उनकी पूजा है कर रही ,
    प्रेम के मनके चुन चुन के प्रेम की माला मन में है बुन रही ,
    हो गयी है वो बाबरी , जग  की झूठी माया से अब उसे कोई मोह नहीं।
    बन गयी है वो जोगन , सईयां से बढ़कर अब कोई धर्म नहीं।

    अपना इक इक पल मैं अब मैं बस तेरे साथ चाहूँ ,
    चौबीस पहर तेरे इस चाँद से चेहरे को निहारूँ।
    रग-रग में मैं तुझे बसा लूँ , जुड़ जाएँ ऐसे हमारे नाम ,
    जैसे श्याम के बाद लिया जाता है राधा का नाम।

    रख दो तुम मेरे लिए दुनिया भर के सोने-चांदी ,
    पर मैं ना छोड़ू अपने सईयां की डोर।

    –    – अभिषेक शर्मा

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