Author: Ibn E ḳhumār

  • प्रीत

    प्रीत

    प्रीत रोग के मारे दिल को
    हम को ये तो बताना था
    हम को .गम तो और भी हैं
    लेकिन इसी का .जमाना धा
    हम को ही पछताना धा
    इस के संग तो .फसाना धा
    लगता ये अ.फसाना है
    हम को तो पछताना है

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